बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार के दोषीयों की रिहाई, महिलाओं का अपमान: सामजिक कार्यकर्ता

भारत के 75वें स्वतंत्रा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर दिया. लेकिन इसी दिन गुजरात सरकार ने 11, सामूहिक बलात्कार और हत्या के सज़ायाफ़ता कैदियों को जेल से रिहा कर दिया.

गुजरात दंगों २०२ – के दोषी जब जेल से बहार आये तो कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने गोधरा जेल के बहार इनका स्वागत भी किया. बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार के दोषीयों की रिहाई पर महिला अधिकारों के लिए सक्रीय रहने वाले सामजिक कार्यकर्ता मुखरता से “गुजरात सरकार” विरोध कर रहे हैं.

समजिक सामजिक कार्यकर्ता मानते हैं की सामूहिक बलात्कार के दोषियों, जिनको आजीवन कारावास की सजा हुई थी, को रिहा कर के भारतीय जनता पार्टी सरकार (बीजेपी) ने “महिला समाज” का अपमान किया है. इसके अलावा कई समजिक संगठन मानते हैं कि सामूहिक बलात्कार की पीड़िता बिलकिस बानो और परिवार की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो गया है.

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने बिलकिस बानो के परिवार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. समिति राष्ट्रिय उपाध्यक्ष और पूर्व संसद सुभाषनी अली का कहना है एक तरफ़ प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से “महिला सम्मान” की बात करते हैं और दूसरी तरफ उनकी पार्टी की सरकार सामूहिक बलात्कार और हत्या के सज़ायाफ़ता कैदियों को रिहा कर देती है. उन्होंने कहा की यह समाज के मुहं पर थप्पड़ मारने जैसा है.

पूर्व संसद सुभाषनी अली कहती है की पीड़ित परिवार इस से डरा हुआ है. गुजरात सरकार ने इस अपराधियों को रिहा करते समय बिलकिस बानो और परिवार की “सुरक्षा” को नज़रंदाज़ कर दिया.

समजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि सामूहिक बलात्कार और हत्या के सज़ायाफ़ता कैदियों को जेल से रिहा कर बीजेपी ने संविधान का मज़ाक उठाया है. महिला अधिकारों के लिए सक्रीय रहने वाली अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला समिति की नेता मीना सिंह कहती है प्रधानमंत्री मोदी-और गृहमंत्री अमित शाह ने “महिला समाज” का अपमान किया है.

उन्होंने कहा की अदालत का दरवाज़े पर फिर दस्तक दी जाये और इन अपराधियों को दोबारा जेल भेजने की अर्जी दी जाये. प्रगतिशील महिला समिति ने बिलकिस बानो के परिवार को सुरक्षा देने मांग की है.
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की “महिला सम्मान” की बाद भी सिर्फ एक जुमला साबित हुई है. पार्टी की नेता सदफ जफ़र कहती है कि जिनको अपराधियों को रिहा किया गया है वह न सिर्फ बलात्कारी हैं बल्कि एक नरसंहार का हिस्सा भी रहे हैं. उनका जुर्म साबित भी हो गया है. उन्होंने कहा की बीजेपी ने साबित कर दिया की उसके लिए “मुस्लिम समाज” की जान और सम्मान का कोई अर्थ या महात्व नहीं है. सदफ आगे कहती हैं की जब से केंद्र में बीजेपी सरकार आई है धीरे धीरे गुजरात दंगों के सभी आरोपियों को जेल से बहार निकल कर राहत दी जा रही है.

वरिष्ठ समजिक कार्यकर्ता मधु गर्ग कहती हैं स्वतंत्रता दिवस की सुबह लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री” ने “नारीशक्ति और नारीसम्मान” को लेकर इतना ओजस्वी भाषण दिया कि लगा कि हमारे प्रधानमंत्री जी को भारत की नारियों के सम्मान की सच में कितनी चिंता है । इधर भाषण और उधर उनके गृहराज्य गुजरात में उम्र कैद की सजा काट रहे 11 बलात्कारियों व हत्यारों को जेल के बाहर आज़ाद छोड़ दिया गया ।

ये अपराधी वे हैं जिन्होंने 5 महीने की गर्भवती बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया और उसके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी और उसकी तीन साल की बच्ची को गोद से छीनकर ज़मीन पर पटक दिया था।

मधु कहती हैं की सीबीआई ने जांच के बाद एफआईआर की थी और तब ये जेल भेजे गये थे ।यह तो स्पष्ट हो गया कि प्रधानमंत्री 15 अगस्त को जिन नारियों की बात कर रहे थे ,वे “मनुस्मृति वाली नारियां” होंगी क्योंकि एक बहादुर नारी तीस्ता सीतलवाड़ जो अन्याय के खिलाफ लड़ी वह जेल में हैं.दूसरी तरफ एक नारी बिलकिस जो अन्याय का शिकार हुई उसके अपराधी जेल से बाहर हैं ।

उलेखनीय है कि मुंबई में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2008 में बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में 11 अभियुक्तों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस सज़ा पर अपनी सहमति की मुहर लगाई थी.

—इंडिया न्यूज़ इस्ट्रीम

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