मुंबई । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के वित्त पर बढ़ते दबाव के बीच मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 की बाकी अवधि के लिए 11,995 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश कीं।
राज्य सरकार ने 11,995 करोड़ रुपए की कुल राशि में से 3,112.85 करोड़ रुपए राज्य में कृषि पंप, पावर लूम और कपड़ा उपभोक्ताओं को बिजली शुल्क में दी गई छूट पर होने वाले खर्च के लिए आवंटित किए हैं, और 803.94 करोड़ रुपए प्रोत्साहन पैकेज योजना के तहत लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों और मेगा परियोजनाओं को प्रोत्साहन के लिए प्रस्तावित किए हैं।
सरकार ने सौर कृषि पंप योजना के लिए एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक से प्राप्त ऋण राशि को राज्य बिजली वितरण कंपनी महावितरण को हस्तांतरित करने के लिए 4,792.02 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए हैं। इस आवंटन का उद्देश्य सरकार के नेट जीरो मिशन के तहत 2030 तक 52 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने की योजना को गति देना है।
सरकार ने जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में 1,431.05 करोड़ रुपए की अतिरिक्त निधि का भी प्रस्ताव रखा है। मार्च 2025 में अजित पवार ने 45,890 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे के साथ बजट पेश किया था।
जून 2025 में, सरकार ने 57,509.71 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश कीं, जिससे राजस्व घाटा एक लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया।
दिसंबर 2025 में शीतकालीन सत्र के दौरान, 75,286.37 करोड़ रुपए की पूरक मांगों के साथ, राजस्व घाटा पहले ही दो लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को छू चुका था। 45,891 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे के अलावा, बजट 2025-26 में अनुमान लगाया गया था कि महाराष्ट्र का ऋण भार बढ़कर 9.32 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।
मंगलवार को पेश की गई पूरक मांगों में राज्य सरकार ने न सिर्फ किसी भी नए और अतिरिक्त व्यय का प्रस्ताव करने से परहेज किया है, बल्कि पूरी तरह से किसानों के लिए बिजली सब्सिडी और उद्योग प्रोत्साहनों पर ध्यान केंद्रित किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 6 मार्च को वर्ष 2026-27 का राज्य बजट पेश करेंगे। उन्होंने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले ही घोषणा कर दी है कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
इससे पहले, विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में सीएम ने कहा था कि राज्य इस वर्ष के अंत तक 16 गीगावाट (जीडब्ल्यू) सौर ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। 2032 तक राज्य का लक्ष्य अतिरिक्त 45 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन करना है, जिसमें से 70 प्रतिशत सौर ऊर्जा से प्राप्त होगी। उन्होंने कहा था कि नवीकरणीय ऊर्जा, जो चार साल पहले 13 प्रतिशत थी, 2030 तक 52 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि किसानों को बिजली आपूर्ति की लागत 8 रुपए प्रति यूनिट से घटकर 3 रुपए प्रति यूनिट से भी कम हो गई है। यह बदलाव न सिर्फ किसानों को लाभ पहुंचा रहा है, बल्कि उद्योगों और परिवारों पर वित्तीय बोझ को भी कम कर रहा है।
बता दें कि सरकार 5,630 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 24,631 करोड़ रुपए के अनुमानित कुल निवेश के साथ पूंजीगत आवंटन कर रही है।
आईएएनएस











