साबरमती आश्रम पुनर्विकास : प्रख्यात लोगों ने किया मोदी के प्रोजेक्ट का विरोध

गांधीनगर, 5 अगस्त (आईएएनएस)| अहमदाबाद में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के पुनर्विकास की केंद्र और गुजरात सरकार की संयुक्त योजना का विरोध करते हुए देश के विभिन्न क्षेत्रों की करीब 130 जानी-मानी हस्तियां 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘गांधी आश्रम स्मारक और सीमा विकास परियोजना’ का विरोध कर रही हैं। वे बुधवार को एक बयान के साथ सामने आए, जिसमें कहा गया है कि प्रस्तावित परियोजना वर्तमान आश्रम की ‘सादगी और पवित्रता से गंभीर रूप से समझौता’ करेगी।

विरोध करने वाले लोगों में गुजरात साहित्य परिषद के अध्यक्ष और प्रसिद्ध गुजराती लेखक प्रकाश शाह, इतिहासकार राजमोहन गांधी और रामचंद्र गुहा, संगीतकार टी.एम. कृष्णा, सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एपी शाह, एडमिरल (सेवानिवृत्त) लक्ष्मीनारायण रामदास, पूर्व आईएएस अधिकारी शरद बिहार, पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो, वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर और कार्यकर्ता हर्ष मंदर और कई अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं। साबरमती में ऐतिहासिक गांधी आश्रम को विकसित करने की केंद्र सरकार की योजना का विरोध करते हुए दावा किया है कि यह इसकी पवित्रता को नुकसान पहुंचाएगा।

उन्होंने बयान में कहा, “यह गांधीवादी संस्थानों पर कब्जा करने का प्रयास है।”

हस्ताक्षर करने वालों में सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी, योगेंद्र यादव, अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड़, लेखक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता जी.एन. देवी, फिल्म निमार्ता आनंद पटवर्धन, लेखक राम पुण्यानी और पूर्व आईएएस, कलाकार और कवि गुलाम मोहम्मद शेख, पत्रकार कुमार केतकर, लेखक पी. साईनाथ सहित अन्य शामिल हैं।

संयुक्त वक्तव्य का शीर्षक ‘गांधीवादी संस्थाओं के सरकारी अधिग्रहण को रोकें’ है।

संयुक्त बयान के अनुसार, “हमें सामूहिक रूप से गांधीवादी संस्थानों के किसी भी सरकारी अधिग्रहण का विरोध करना चाहिए, जबकि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार भारत और दुनिया भर के प्रतिष्ठित गांधीवादियों, इतिहासकारों और पुरालेखपालों के परामर्श से ऐसे संस्थानों के उचित रखरखाव के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग जारी रखे।”

समाचार पत्रों की रिपोर्ट के अनुसार नव निर्मित ‘विश्व स्तरीय’ स्मारक में नए संग्रहालय, एक एम्फीथिएटर, वीआईपी लाउंज, दुकानें, फूड कोर्ट सहित अन्य चीजें होंगी।

बयान में कहा गया है, “लेकिन, पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस जगह को कभी भी ‘विश्व स्तरीय’ बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी। गांधी के करिश्मे के साथ-साथ इस जगह की प्रामाणिकता और सादगी काफी है।”

साबरमती नदी के तट पर स्थित गांधी आश्रम, जिसे साबरमती आश्रम भी कहा जाता है। यहां महात्मा गांधी 1917 और 1930 के बीच भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करते हुए रहते थे। अब इसका प्रबंधन साबरमती आश्रम प्रिजर्वेशन एंड मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

हस्ताक्षरकर्ता भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्णय लेने के लिए शीघ्र ही एक बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।

–आईएएनएस

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