देश के किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी दाम दिलाना केंद्र सरकार की प्रथम प्राथमिकता -शोभा करांदलाजे

कोरोना महामारी की विषम परिस्थितियों में जब अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों की गतिविधियां थम-सी गई थीं उस समय भी देश के किसान खेतों व खलिहानों में अपने काम में जुटे हुए थे। उन्हें देश के 135 करोड़ से ज्यादा लोगों का पेट भरने की चिंता थी। ऐसे मेहनतकश किसानों के दुख-दर्द को महसूस करने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विगत वर्षों के दौरान कृषि सुधार के अनेक कदम उठाए हैं। इन सुधारों का लक्ष्य खेती-किसानी को लाभकारी बनाना है। लिहाजा, खेती की लागत कम करने के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर व लाभकारी दाम दिलाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है।

देश के किसानों को आज कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ज्यादा भाव मिल रहे हैं। उन्हें खाद्यान्नों के साथ-साथ नकदी फसलों के भी एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं और जिन फसलों के दाम एमसपी से नीचे हैं, उनकी सरकारी खरीद की सुचारु व्यवस्था की गई है। यह मोदी सरकार की किसान हितैषी नीतियों का ही नतीजा है।

देश में इस साल अच्छी मानसूनी बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हुई है और कई फसलों की पैदावार में भी इजाफा होने का अनुमान है। खासतौर से खाद्यान्नों के उत्पादन में फिर नया रिकाॅर्ड बनने जा रहा है। उत्पादन में लगातार हो रही बढ़ोतरी के साथ-साथ किसानों को विभिन्न फसलों का बेहतर दाम मिलना भी सुनिश्चित हुआ है।
देश के बाजारों में सोयाबीन और कपास के भाव उनके एमएसपी से काफी ऊँचे चल रहे हैं। चालू फसल वर्ष 2021-22 में कपास का एमएसपी 5726 रुपये (मध्यम रेशा) और 6025 रुपये ( लंबा रेशा) प्रति क्विंटल है जबकि बाजार में कपास का भाव 8000 रुपये प्रतिक्विंटल से भी ऊँचा है। इसी प्रकार, बाजार में सोयाबीन का भाव भी एमएसपी से काफी ऊँचा है।

वहीं, सरकारी एजेंसियां किसानों से एमएसपी पर धान की खरीद कर रही हैं। चालू खरीफ विपणन सीजन (केमएस) 2021-22 में 8 नवंबर 2021 तक सरकारी एजेंसियों ने किसानों से एमएसपी पर 209.52 लाख टन से अधिक धान की खरीद कर ली थी। इससे करीब 11.57 लाख किसान 41,066.80 करोड़ रुपये के एमएसपी मूल्य के साथ लाभान्वित हुए हैं।पिछले सीजन में सरकारी एजेंसियों ने रिकाॅर्ड स्तर पर धान और गेहूं की खरीद की थी।

फसलों की सरकारी खरीद की सुचारु व्यवस्था किए जाने से किसानों को उचित व लाभकारी मूल्य मिलना सुनिश्चित हुआ है। साथ ही, एमएसपी पर होने वाली खरीद का पैसा सीधे किसानों के खाते में जाने लगा है। इससे किसानों को बिचैलिये से मुक्ति मिली है।

मोदी सरकार ने विभिन्न फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी करने के साथ-साथ सरकारी खरीद एजेंसियों के माध्यम से किसानों से फसलों की खरीद के भी पुख्ता प्रबंध किए हैं।

धान की सामान्य वेरायटी का एमएसपी 2013-14 में 1,310 रुपये था जोकि 2021-22 में बढ़कर 1,940 रुपये प्रतिक्विंट हो गया है। मोदी सरकार के कार्यकाल में धान के एमएसपी में 48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि कई अन्य फसलों के एमएसपी में डेढगुना़ से लगभग दोगुना तक इजाफा हुआ है। मसलन, कपास के एमएसपी में इस दौरान करीब 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि मूंग के एमएसपी में करीब 62 फीसदी का इजाफा हुआ है और रामतिल के एमएसपी में 98 फीसदी का इजाफा हुआ है।

किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध मोदी सरकार को सबसे ज्यादा चिंता लघु एवं सीमांत किसानों की है, जो आजादी के सात दशक बीत जाने पर भी साधन संपन्न नहीं बन पाए। देश में 80 फीसदी से ज्यादा लघु व सीमांत किसान हैं जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम खेती की जमीन है। इनके पास पूंजी और साधन का नितांत अभाव है। ये किसान आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने से वंचित रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन लघु व सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के मकसद से ही देश में 10,000 नये किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ बनाने का लक्ष्य रखा है। इन एफपीओ के माध्यम से लघु एवं सीमांत किसानों की पहुंच आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी से लेकर बाजार तक बनाने की कोशिश की जा रही है।

भारत सरकार द्वारा हाल के वर्षों में कृषि क्षेत्र में सुधार को लेकर लिए गए नीतिगत फैसलों का मकसद भी किसानों को लाभ पहुंचाना है। किसान रेल चलाये जाने से उत्पाद बाजार से उपभोक्ता बाजार तक फलों, सब्जियों व जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों का त्वरित व सुगम परिवहन सुनिश्चित हुआ है। इससे फसलों की बर्बादी कम होने के साथ-साथ किसानों को अच्छे भाव भी मिल रहे हैं।

फलों, सब्जियों, मसालों समेत तमाम कृषि एवं बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2021-22 के अप्रैल से लेकर सितंबर महीने तक यानी पहली छमाही में कृषि एवं संबंधित क्षेत्र के उत्पादों के निर्यात का मूल्य 1,26,808.02 करोड़ रुपये रहा, जोकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान हुए निर्यात के मूल्य 1,06,993.68 करोड़ रुपये की तुलना में 18.52 फीसदी अधिक है। भारत सरकार द्वारा कृषि निर्यात को दिए जा रहे प्रोत्साहन का सीधा लाभ देश के किसानों को मिल रहा है।

कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है क्योंकि देश की आबादी के एक बड़ा हिस्सा अपनी रोजी-रोटी के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर करता है। मोदी सरकार खेती-किसानी के काम को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि भारत के सकल मूल्यवर्धित यानी जीवीए में कृषि की हिस्सेदारी बढ़कर 20 फीसदी से ज्यादा हो गई है।
किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध मोदी सरकार खेती की लागत कम करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर व लाभकारी दाम सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

फसल वर्ष 2021-22 के प्रथम अग्रिम अनुमान में सिर्फ खरीफ सीजन में खाद्यान्नों का उत्पादन 15.05 करोड़ टन होने का आकलन किया गया है जोकि लगातार छठे साल उत्पादन में बढोतरी़ को दर्शाता है। कोरोना की विषम परिस्थितियों के बावजूद खेती-किसानी का काम निर्बाध गति से चलता रहा है, जिसका परिणाम यह हुआ कि देश का अन्नागार भरता रहा और सरकार को इस विकट परिस्थिति का सामना करने की ताकत मिली।

भारत आज अपनी जरूरतों से ज्यादा अनाज का उत्पादन कर रहा है और इस साल भी खरीफ सीजन में रिकाॅर्ड 10.70 करोड़ टन चावल का उत्पादन होने का अनुमान है क्योंकि धान का रकबा 411 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

किसानों ने धान के साथ-साथ दलहनी फसलों की बुवाई में में भी ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। दलहनों की पैदावार बढ़ने से घरेलू खपत की पूर्ति के लिए आयात की आवश्यकता कम होगी।

मगर, तिलहनी फसलों और मोटे अनाजों का रकबा पिछले साल से कम है। जबकि तिलहनों व मोटे अनाजों की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी बढ़नी चाहिए। देश में तिलहनों की पैदावार बढ़ेगी तो खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम होगी। वहीं, पौष्टिक तत्वों से भरपूर मिलेट्स व मोटे अनाजों को बदलती परिस्थितियों में आज लोग ज्यादा पसंद करने लगे हैं, जिससे इनकी मांग ज्यादा होने लगी है। मोटे अनाजों की खेती में पानी की जरूरत भी कम होती है और उत्पादन लागत भी कम लगती है। रागी, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों भरपूर पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत दिनों एक कार्यक्रम के दौरान भारत में मिलेट्स की खेती की परंपरा का जिक्र किया। देश के विभिन्न हिस्सों में पहले अनेक प्रकार के मिलेट्स की खेती होती रही है आज उस परंपरा को फिर से अमल में लाने की जरूरत है।
जिन क्षेत्रों में पानी का संकट है और भूजल-स्तर काफी नीचे चला गया है वहां के किसानों को धान और गन्ना जैसे ज्यादा पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय ऐसे फसलों की खेती में दिलचस्पी लेनी चाहिए जिनमें पानी की जरूरत कम होती है और लागत कम होने से अपेक्षाकृत मुनाफा ज्यादा होने की गुंजाइश बनी रहती है।

लिहाजा, सरकार की ओर से खेती के पैटर्न में बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है क्योंकि यह वक्त की जरूरत है। व्यावहारिक तौर पर देखा जा रहा है कि नकदी फसलों और फलों व सब्जियों की खेती से किसानों को ज्यादा फायदा हो रहा है। इसलिए केंद्र सरकार मिशन के तौर पर तिलहनों और बागवानी उत्पादों की खेती को प्रोत्साहन दे रही है।

(इस आलेख में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री शोभा करांदलाजे के निजी विचार हैं।)

——— इंडिया न्यूज़ स्ट्रीम

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