पेट्रोल-डीज़ल ने निकाला आम आदमी का तेल, मई-जून में 32 बार बढ़े दाम

30 जून, 2021

नई दिल्ली: आज बुधवार को देश में पेट्रोल-डीज़ल क़ीमतों में इज़ाफ़ा नहीं किया गया है। कल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की क़ीमतों में हल्की राहत देखने को मिली थी। शायद इसी वजह से आज ईंधन क़ी क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा नहीं हुआ है। महीने के दिन सरकार ने आम लोगों को थोड़ी राहत दी है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि पिछले दो महीनों में पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों ने आम आदमी आख़िरी का तेल निकाल कर रख दिया है।

58 दिन नें 32 बार बढ़े दाम

मई-जून में कुल 32 बार पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ चुके हैं। 16 बार मई में और 16 बार जून में। इस दौरान दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 8.41 रुपए इज़ाफ़ा हुआ है जबकि डीज़ल की कीमत 8.45 पैसे बढ़ गई है। देश के बाक़ी हिस्सों में भी इनकी क़ीमतों में लगभग इतना ही इज़ाफ़ा हुआ है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान दो महीनों तक मार्च-अप्रैल में एक बार भी पेट्रोल-डीज़ल क दाम नहीं बढ़े थे। लेकिन 2 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद 4 मई को पहल बार इनकी क़ीमतों मे इज़ाफ़ा हुआ था। उसके बाद से हर दूसरे दिन दाम बढ़ रहे हैं।

320 ज़िलों में पेट्रोल का शतक

पेट्रोल-डीज़ल के दामों लगातार हो रही बढ़ोतरी से 320 ज़िलों में पेट्रोल की क़ीमत 100 के पार पहुंच गई है। 13 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल की क़ीमत 100 रुपए से ज़्यादा हो गई है। छह राज्यों के सभी ज़िलों में पेट्रोल 100 के पार पहुंच चुका है। इनमें मध्य प्रदेश के 52, महाराष्ट्र के 36, राजस्थान के 33, तेलंगाना के 31, मणिपुर के 16, आंध्र प्रदेश के 14 और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के दोनों ज़िले शामिल हैं। अन्य राज्यों के भी ज़्यादातर ज़िलों में पेट्रोल शतक तगा चुका है। जल्द ही इन राज्यों के सभी ज़िलों में पेट्रोल 100 के पार बिकेगा। फ़िलहाल कर्नाटक के 29, बिहार के 32, तमिलनाडु के 30, ओडीशा के 15, पंजाब के 16, केरल के 5 छत्तीसगढ़ के एक और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के 8 ज़िलों में पेट्रोल 100 के पार बिक रहा है।

नौ ज़िलों में डीज़ल क भी शतक

देश के तीन राज्यों के 9 ज़िलों में डीज़ल भी शतक लगा चुका है। इनमें राजस्थान, ओडीशा और मध्य प्रदेश के तीन-तीन ज़िले हैं। इनमें डीज़ल की क़ीमत 100 रुपए लेकर 102 रुपए से भी ज़्यदा हो गई है। जल्द ही कई और ज़िलों में भी डीज़ल सौ के पार बिकेगा।

ग़रीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ता बोझ

देशभर में विरोध के बावजूद पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना और लाकडाउन से बेहाल चल रही जनता पर पेट्रोल के बढ़ते दामों ने अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। इससे हर रोज़ बढ़ने वाली महंगाई ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है। पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ने का सबसे ज़्यादा असर आम आदमी पर पड़ता है। ख़ास कर समाज के निचले और मध्यम वर्ग पर। पेट्रोलियम कंपनियों के एक सर्वे के मुताबिक़ पेट्रोल की सबसे ज़्यादा 61.42 प्रतिशत खपत दो पहिया वाहन में होती है। उसके बाद छोटी और मध्यम कारों में 34 फ़ीसदी खपत होती है। जबकि एसयूवी और अन्य लक्ज़री गाडियों में पेट्रोल की सिर्फ़ 2.34 फीसदी ही खपत होती है। इस लिहाज़ से देखें तो विलासितापूर्ण जीवन जीने वालों पर पेट्रोल के बढ़ते दामों का उतना असर नहीं होता जितना कि ग़रीब और मध्यम वर्ग पर पड़ता है।

दुपहिया वाहन वालों पर मार

पेट्रोल के बढ़ते दामों की सबसे ज़्यादा मार स्कूटी, स्कूर और मोटर साइकिल इस्तेमाल करने वालों पर होती है। डिलीवरी ब्वाय का काम करने वालों पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ता है। ग़रीब और मध्यम वर्ग पर पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों से दोहरी मार पड़ती है। बार-बार दाम बढ़ने पर प्रत्यक्ष रूप से उनका पेट्रोल होने वाला ख़र्च बढ़ जाता है। पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ने से रोज़मर्रा के इसेतमाल की चीज़ों के दाम बढ़ने से अप्रत्क्ष रूप से उनके घर का पूरा बजट बिगड़ जाता है। हर दूसरे-तीसरे दिन पेट्रोल के 25-30 पैसे मंहगा होने से आम लोगों का तेल निकलने लगा है।

सबसे ऊंची महंगाई दर, नाकाम सरकार

मई के महीने में थोक और खुदरा महगांई दर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी है। पेट्रोल-डीज़ल की लगातार बढ़ती क़ीमतों की वजह से जून में इसके और ऊपर पहुंचने की आशंका है। सरकार के पास फिलहाल कोई ठोस उपाय दिख भी नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण महंगाई पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ज़रूर कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को सलाह दे रहे हैं कि वो अपनी राज्य सरकारों से पेट्रोल-डीज़ल पर वैट करने को कहें।

रिज़र्व बैंक की सलाह

रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास कह रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद ख़राब हुए आर्थिक हालात के दुरुस्त करने के लिए हर क्षेत्र मौद्रिक नीति में बदलाव से लेकर तमाम दूसरे क़दम उठाने की ज़रूरत है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिनके सिर पर सरकार के साथ मिलकलर महंगाई रोकने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने की ज़िम्मेदारी है, वो सिर्फ़ सलाह दे रहे हैं। दो हफ्ते पहले उन्होंने आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से अपने-अपने हिस्से का टैक्स कम करने की अपील की थी। लेकिन अफसोस के उनकी इस अपील पर न मोदी सरकार का दिल पसीजा और न ही किसी राज्य सरकार के कानों पर ही जूं रेंगी।

दरअसल महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आए दिन बढ़ने वाले पेट्रोल-डीज़ल के दाम हैं। नरेंद्र मोदी 50 रुपए प्रति लीटर से कम में पेट्रोल देने का वादा करके सत्ता में आए थे। लेकिन उनके सत्तासीन होने के साल साल में पेट्रोल 2014 में 71 रुपए प्रति लीटर के मुक़ाबले 100 के पार चला गया है। पेट्रोल तो पेट्रोल देश के कई हिस्सों में डीज़ल के दाम भी सौ रुपए का आंकड़ा पार कर चुके हैं। 2 मई को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से ही पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों मे आग लगी हुई है और लगभग हर रोज़ बढ़ने वाली क़ीमतें आम आदमी का तेल निकाल रहीं हैं।
—-इंडिया न्युज़ इस्ट्रीम

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