मणिपुर में नेशनल ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल का 12 नवंबर को आगाज, जनजातीय कला और संस्कृति को सम्मान

इम्फाल । मणिपुर में 12 नवंबर से चार दिन तक ‘नेशनल ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल 2025’ का आयोजन किया जा रहा है। यह फेस्टिवल देशभर की जनजातीय कला, संस्कृति और फिल्मों को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।

यह भारत की विविध परंपराओं और रचनात्मकता को लोगों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

मणिपुर के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग बाजपेयी ने बताया कि इस साल के ‘नेशनल ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल’ में कुल 23 फिल्में दिखाई जाएंगी। इन फिल्मों का प्रतिनिधित्व नौ राज्यों से होगा, जिनमें महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल का मकसद सिर्फ फिल्में दिखाना नहीं, बल्कि भारतीय जनजातीय समुदायों की विविधता और उनकी सांस्कृतिक धरोहर को भी आगे बढ़ाना है।

फिल्मों के चयन में अलग-अलग तरह की रचनात्मकता को शामिल किया गया है। इस बार कार्यक्रम में 6 फीचर फिल्में, 2 डॉक्यूमेंट्री फिल्में, 14 शॉर्ट फिल्में और एक एनीमेशन फिल्म दिखाई जाएंगी।

एनीमेशन फिल्म ‘रानी गैदिनलिउ’ के जीवन पर आधारित 15 मिनट की फिल्म है, जिसे नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएफडीसी) ने बनाया है। यह दर्शकों को एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कहानी से रूबरू कराएगी।

फेस्टिवल में 16 नेशनल गेस्ट, 27 राज्य प्रतिनिधि और पांच ट्राइबल फिल्म फोरम और एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही दो मास्टर क्लास, पैनल डिस्कशन और दो ‘इन-कॉन्वर्सेशन’ सेशन भी आयोजित होंगे, जहां फिल्मकार और कल्चर एक्सपर्ट्स अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। यह सभी चीजें दर्शकों और प्रतिभागियों को न केवल मनोरंजन, बल्कि सीखने और विचार-विमर्श करने का मौका देंगी।

ओपनिंग सेरेमनी 12 नवंबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जबकि 15 नवंबर को क्लोजिंग सेरेमनी को जनजातीय नेता धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के रूप में मनाया जाएगा।

इसका उद्देश्य भारत के जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत, उनके योगदान और उनकी विविधता को देशभर में उजागर करना है।

–आईएएनएस

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