नई दिल्ली : राजधानी का अंबेडकर विश्विद्यालय देश से विलुप्त होती भारतीय ज्ञान परम्परा को संरक्षित करने के लिए डिजिटल अभिलेखागार बनाएगा।
अठारवीं और उन्नीसवीं सदी में देश मे लाखों पांडुलिपियां गायब हो गयीं और जो बची उन पर न तो देश के इतिहासकारों ने ध्यान दिया और न विदेशी इतिहासकारों ने उनका नोटिस लिया।
अंबेडकर विश्विद्यालय द्वारा कल शाम भारतीय ज्ञान परम्परा पर चुप्पियों का षड्यंत्र विषय पर आयोजित व्याख्यान का उद्घाटन दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने किया। व्याख्यान संस्कृत के अंतरराष्ट्रीय विद्वान डॉक्टर राधा वल्लभ त्रिपाठी ने दिया।यह व्यायख्यान प्रख्यात इतिहासकार धर्मपाल की स्मृति में आयोजित किया गया।
श्री सिसोदिया ने डिजिटल अभिलेखागार की जानकारी देते हुए कहा कि अपने देश मे ज्ञान और शिक्षा की कद्र नहीं है क्योंकि राजनीति को इससे वोट नहीं मिलता।भारत की शानदार ज्ञान परम्परा रही है लेकिन कहीं हमसे चूक हुई है जिससे भारतीय ज्ञान परम्परा समाप्त हो गयी।
उन्होंने धर्मपाल को सबसे मौलिक सोच का बहुत बड़ा दार्शनिक और इतिहासकार बताते हुए देश के हर शिक्षा मंत्रियों शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को उनकी किताब पढ़ने को कहा।
उन्होंने कहा कि देश की तरक्की शिक्षा से होती है यह बात हमारे नेताओं ने आज तक समझी नहीं जिसकेकारण हम विकास नहीं कर सके।
कुलपति अनु सिंह लाठर ने कहा कि उनका विश्विद्यालय भारतीय ज्ञान की परंपरा का पोर्टल बनाएगा जिस पर सभी सामग्री डिजिटल रूप में डाली जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा और जीवन शैली खानपान पद्धति को पश्चिम के लोगों ने हेय दृष्टि से देखा जिसके कारण हमने अपने ज्ञान पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट ने 95 में जब विंडो बनाया था तो सेभारत के युवा लड़कों ने तैयार किया था जो गैर अंग्रेजी भाषी थे।
डॉक्टर त्रिपाठी ने कहा कि आज लोगों को पता नहीं कि संस्कृत के पंडितों ने मुगल बदशाओं के बारे में लिखा और राष्ट्रीय आंदोलन में संस्कृत के कवि जेल भी गए तथा उन्होंने भी अंग्रेजों के खिलाफ लिखा।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल वेद पुराणों ऋग्वेद तक सीमित नहीं बल्कि मध्यकाल में अनेक पंडितों ने उस दौर में अनेक ग्रंथों की रचना की और वह संस्कृत का स्वर्ण युग था।आठरहवी तथा 19 वी सदी में लाखों पांडुलिपियां विलुप्त हो गयीं और इतिहासकारों ने उनका संज्ञान नहीं लिया।
उन्होंने महामहोपाध्याय पंडित रामावतार शर्मा पंडित गोपीनाथ कविराज और धर्मपाल को बीसवीं सदी का सबसे बड़ा भारतीय विचारक बताया जिनकी आज चर्चा तक नहीं होती।
अंबेडकर विश्विद्यालय की अनुसंधान परियोजना के प्रमुख अभय कुमार दुबे ने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा को बढ़ाने के लिए एक पत्रिका भी निकाली जाएगी और व्यायख्यान आयोजित किये जायेंगे।
–इंडिया न्यूज़ स्ट्रीम











