नागालैंड में बड़े पैमाने पर होगी कॉफी की खेती, 50,000 हेक्टेयर में पैदावार का लक्ष्य

कोहिमा, 5 नवंबर (आईएएनएस)| नागालैंड में रोजगार सृजन और फसलों की अवैज्ञानिक खेती को रोकने के लिए वर्ष 2030 तक खेती के रकबे को मौजूदा 10,000 हेक्टेयर से बढ़ाकर 50,000 हेक्टेयर करने के लक्ष्य के साथ कॉफी की खेती को बड़े पैमाने पर शुरू किया है। कृषि उत्पादन आयुक्त वाई. किखेतो सेमा ने शुक्रवार को यह बात कही। सेमा ने कहा कि नागालैंड की पहाड़ियों में अब जैविक कॉफी की खेती हो रही है, जिसे न केवल स्थानीय स्तर पर बेचा जा रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में नागालैंड के किसानों के लिए कॉफी पेश की गई थी, लेकिन बाजार से जुड़ाव और अन्य कारकों की कमी ने किसानों को खेती छोड़ने के लिए मजबूर किया।

साल 2016 में सेमा की अध्यक्षता में भूमि संसाधन विभाग ने फिर से कॉफी की खेती को पुनर्जीवित करने और कॉफी के बीजों की नई किस्मों के बारे में जानने का फैसला किया कि उन्हें नागालैंड की ठंडी और पहाड़ी जलवायु में कैसे लगाया और उगाया जाए।

उन्होंने कहा, “नागालैंड में इस समय लगभग 10,000 हेक्टेयर भूमि में कॉफी की खेती होती है और 2030 तक इसे 50,000 हेक्टेयर तक विस्तारित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। भूमि संसाधन विभाग ने एक दक्षिण अफ्रीकी कंपनी को 27.5 मीट्रिक टन कॉफी का निर्यात किया है। इस कंपनी ने पहले नागालैंड से 30 साल तक कॉफी खरीदने के लिए समझौता किया था।

सेमा ने कहा, “हमारा उद्देश्य कम से कम एक लाख नौकरियां पैदा करना है, क्योंकि नागालैंड में औद्योगिक गतिविधियों का अभाव है। एक अन्य उद्देश्य किसानों को खेती (खेती की स्लैश और बर्न विधि) को छोड़ने और कॉफी पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित करके जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को रोकना है।”

नागालैंड के मुख्य सचिव जे. आलम ने सेमा और अन्य अधिकारियों के साथ गुरुवार को कोहिमा के सेंडेन्यू गांव में केएएस कॉफी फार्म का दौरा किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार कोविड-19 महामारी के दौरान कई विकासात्मक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाई, लेकिन यह जाना कि राज्य बाहरी दुनिया पर कितना निर्भर है और राज्य को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर होने की कितनी जरूरत है।

एक आधिकारिक बयान में आलम ने जोर देकर कहा कि सरकारी रोजगार अपने संतृप्ति बिंदु पर पहुंच गया है, इसलिए युवाओं को अन्य रास्ते तलाशने और निवेश करने की जरूरत है। कॉफी एक बहुत ही आशाजनक फसल है, इसलिए उन्होंने युवाओं से इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी करने का आग्रह किया जिसमें मेहनत तो ज्यादा जरूर करनी पड़ती है, मगर आय का टिकाऊ स्रोत हों।

मुख्य सचिव ने कहा, “क्षमता हमेशा से रही है और हम बहुत उपजाऊ भूमि और विशाल संसाधनों के साथ धन्य हैं। पिछले दशकों से हम व्यवहार्य फसलों के लिए विभिन्न भूमि आधारित गतिविधियों में प्रयोग करते रहे, पर दुर्भाग्य से यह विफल रहा।”

सेंडेन्यू गांव में केबेंटसिन एग्री एंड एलाइड कोऑपरेटिव सोसाइटी (केएएएस) कॉफी फार्म 2015 में 25-26 हेक्टेयर भूमि पर शुरू किया गया था।

इस समय फार्म के भीतर कॉफी संयंत्रों की कुल संख्या लगभग 80,000 है।

–आईएएनएस

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