नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय का इतना गौरव शाली इतिहास रहा है कि इसके दो पूर्व छात्र नोबेल पुरस्कार विजेता रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस सहित चार चीफ जस्टिस भी इस विश्विद्यालय ने दिये हैं। इतना ही नहीं डीयू ने 15 से अधिक मुख्यमंत्री और राज्यपाल, दिए और भूत पूर्व सीएजी, एलजी और कई सेनाध्यक्षों आदि सहित 80 से अधिक कैबिनेट सचिव, भी दिए। साथ ही 150 पद्म पुरस्कार विजेता ही इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं।
यह जानकारी कल शाम
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप पुरी ने डीयू एलुमनी मीट में दिया। उन्होंने कहा कि वह अपनी मातृ संस्था दिल्ली विश्वविद्यालय में पहुंचकर बहुत ही गर्वित महसूस कर रहे हैं।उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में 1968 में अपने दाखिला लेने के समय के हालातों का वर्णन करते हुए बताया उस समय भारत की जीडीपी 50 बिलियन डॉलर की थी जो आज 3.8 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जब श्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली उस समय हम दुनिया की 9वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे, लेकिन आज हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने आशा जताते हुए कहा कि जल्द ही हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे और इस विकास गाथा में दिल्ली विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा, क्योंकि देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थी यहां शिक्षा के लिए आते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने विश्वविद्यालय की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय के लिए अनुदान का आह्वान भी किया।
श्री पुरी ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में दिल्ली विश्वविद्यालय ने बहुत अच्छा काम किया है और आजहमें अगले 100 वर्ष के लिए सोचना है। उन्होंने कुलपति प्रो. योगेश सिंह द्वारा डीयू फाउंडेशन के लिए अनुदान के माध्यम से 1000 करोड़ रुपए का फंड जुटाने के टारगेट की सराहना करते हुए कहा कि हार्वर्ड और येल जैसे विश्वविद्यालयों का अनुदान 40 से 50 बिलियन डॉलर है। इस अवसर पर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन के लोगो और वैबसाइट का विमोचन भी किया।
प्रोफेसर योगेश सिंह ने बताया कि तीन कालेजों से 1922 में डीयू ने40 हज़ार के अनुदान अपना सफर शुरू किया था। आज 90 कालेज हो गए और डीयू का खर्च एक हज़ार एक सौ करोड़ हो गया।750 छात्रों से शुरू हुए डीयू में आज 6 लाख से अधिक छात्र हैं।1948 में पहली पीएचडी हुई और आज डीयू में 910 छात्रों ने पिछले दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की ।देश के किसी विश्विद्यालय में इतनी पीएचडी नहीं होती।डीयू ने स्त्री सशक्तिकरण में बड़ा कार्य किया।आज कुल छात्रों में 51प्रतिशत लड़कियां हैं।
उन्होंने बताया कि इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप के विकास और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में सेक्शन 8 कंपनी उदमोदय फाउंडेशन की स्थापना की गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के शुभचिंतकों एवं पूर्व छात्रों के इंटरेक्शन को बढ़ावा देने के लिए दूसरी कंपनी यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फाउंडेशन भी बनाई गई है। कुलपति ने इसके लिए धन जुटाने हेतु विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों से अनुदान का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य 1000 करोड रुपए का है। उन्होंने बताया कि इसमें एलआईसी ने फिलहाल एक करोड़ रुपए के साथ एक चेयर शुरू कर दी है।
कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय ने कंपीटेंस इन्हांसमेंट कोर्स शुरू करने की योजना बनाई है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी पूरे प्रोग्राम की बजाय किसी कोर्स विशेष को भी ज्वाइन कर सकता है। उन्होंने बताया कि इसे इसी वर्ष जुलाई में लांच कर दिया जाएगा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने समर्थ के नाम से एक सॉफ्टवेयर विकसित किया है। अब सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी और देश के अन्य प्रीमीयर इंस्टीट्यूट समर्थ पोर्टल पर हैं। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजज प्रोफेसर बलराम पाणी, दक्षिणी दिल्ली परिसर के निदेशक प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह, कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता, एलुमनी अफेयर्स की डीन प्रोफेसर श्यामा रथ, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फाउंडेशन के सीईओ प्रोफेसर अनिल कुमार, एसओएल की निदेशक प्रोफेसर पायल मागो, प्रोक्टर रजनी अब्बी, पीआरओ अनूप लाठर, शताब्दी समारोह समिति की कन्वीनर प्रोफेसर नीरा अग्निमित्रा, डीयू के पूर्व छात्र डॉक्टर करण सिंह आदि सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के सम्मानीय पूर्व विद्यार्थी, डीन्स, प्रिंसिपल, शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे।
— इंडिया न्यूज स्ट्रीम











