जेएनयू में नारेबाजी पर सांसद मनोज झा बोले, अभिव्यक्ति की भी एक सीमा होनी चाहिए

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विरोध-प्रदर्शन किए गए। इस दौरान लगाए गए नारों को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की मर्यादा और आपराधिक न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मनोज झा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि वह इस विषय पर पहले भी लिखते और बोलते रहे हैं कि हमारे लोकतंत्र में ‘मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी बंद होने चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए अन्य आपत्तिजनक नारों और ‘मुर्दाबाद’ वाले नारों में आखिर फर्क क्या है। आक्रोश स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति की भी एक सीमा होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें साथ बैठकर सामूहिक रूप से यह तय करना होगा कि असहमति और विरोध किस भाषा में व्यक्त किया जाए।

शरजील इमाम और उमर खालिद के मामलों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि देश में बहुत से लोगों को यह लगा कि इन दोनों को जमानत मिल जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पांच साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन ट्रायल के नाम पर बहुत कम प्रगति हुई है। यह स्थिति अपने आप में चिंता का विषय है कि किसी व्यक्ति को कितने वर्षों तक जेल में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आपराधिक न्याय प्रणाली पर एक गंभीर चोट है और ‘सेलेक्टिव गुस्से’ का सवाल भी यहीं से पैदा होता है।

राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि लोगों का गुस्सा स्वाभाविक है, लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि क्या यह गुस्सा सभी मामलों में समान रूप से दिखाई देता है या फिर चुनिंदा मुद्दों तक सीमित रह जाता है। लंबे समय तक बिना ठोस ट्रायल के किसी को जेल में रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इस पर गंभीर बहस की जरूरत है।

मनोज झा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार और अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ऐसे अहम सवाल सत्ता के गलियारों तक क्यों नहीं पहुंचते और जनता को स्पष्ट जवाब क्यों नहीं मिलते।

उन्होंने कहा कि वह अपनी आवाज उठा सकते हैं और संभव है कि कुछ चैनलों पर यह दिखाया भी जाए, लेकिन असली सवाल यह है कि इन समस्याओं का समाधान कौन करेगा। उन्होंने 1971 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में जब ऐसी परिस्थितियां बनी थीं, तब मल्टी-पार्टी मीटिंग्स बुलाई गई थीं और सामूहिक रूप से फैसले लिए गए थे, लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई व्यापक चर्चा दिखाई नहीं देती।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का जिक्र करते हुए मनोज झा ने आगे कहा कि जब अमेरिका जैसे देशों में प्रधानमंत्री को लेकर तीखी टिप्पणियां हो रही हैं, तब भारत में एक तरह की चुप्पी और खालीपन नजर आता है। दक्षिण एशिया का पूरा राजनीतिक और कूटनीतिक आर्किटेक्चर चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सभी देश अपने-अपने रिपोर्ट कार्ड देखने में असमर्थ होते जा रहे हैं।

–आईएएनएस

अमेरिका पहुंचेगा वेनेजुएला का 50 मिलियन बैरल तेल, दोनों देशों को होगा फायदा : ट्रंप

वाशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 मिलियन से 50 मिलियन बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेगी। ट्रंप के अनुसार, यह...

नए लेबर कोड से खदान श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा : केंद्रीय मंत्री

नई दिल्ली । चार नए लेबर कोड का उद्देश्य 'विकसित भारत' को बनाना और खदान श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह बयान बुधवार को केंद्रीय श्रम और...

गम को पीछे छोड़ ‘कर्म’ पर वापसी : धर्मेंद्र के निधन के बाद पहली बार मुस्कुराती दिखीं हेमा मालिनी

मुंबई । हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार धर्मेंद्र के निधन के बाद उनका पूरा परिवार और फैंस दोनों ही इस क्षति से उबर नहीं पा रहे हैं। हेमा मालिनी के लिए...

उत्तर प्रदेश में 20 आईपीएस के तबादले, डॉ. संजीव गुप्ता बने एडीजी लखनऊ

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बुधवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यहां 20 आईपीएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में एडीजी, आईजी और डीआईजी स्तर के...

जेएनयू में आरोपी छात्रों पर होगी कार्रवाई, विश्वविद्यालय लेगा एक्शन

नई दिल्ली । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने मंगलवार को एक आधिकारिक जानकारी के माध्यम से स्पष्ट किया है कि जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ...

जेएनयू में ये छात्र पढ़ने जाते हैं या आतंकवाद फैलाने: हाजी अरफात शेख

मुंबई । महाराष्ट्र भाजपा नेता हाजी अरफात शेख ने जेएनयू में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि वहां छात्र पढ़ने...

जेएनयू में हुए कृत्य को देशद्रोह की तरह देखा जाना चाहिए: विश्वास सारंग

भोपाल । मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने दिल्ली के जेएनयू कैंपस में सोमवार रात लगे नारों की जमकर आलोचना की है। ये नारे दिल्ली दंगों में शामिल शरजील...

कोलकाता: सीनियर रेजिडेंट डॉ. अनिकेत महतो ने छोड़ा पद, 30 लाख रुपए का बॉन्ड भरने के लिए मांगी मदद

कोलकाता । आरजी कर रेप-मर्डर केस में न्याय की मांग करने वाले जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो ने पिछले हफ्ते सीनियर रेजिडेंट पद से हटने के अपने फैसले की घोषणा की...

जब मुसलमान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन सकते हैं तो मेयर क्यों नहीं: वारिस पठान

मुंबई । एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के महापौर को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जब देश का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति मुसलमान...

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस में बड़ा फेरबदल

कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य पुलिस में व्यापक फेरबदल की घोषणा की। पश्चिम बंगाल पुलिस निदेशालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार,...

देश में कहीं सबसे भ्रष्ट सरकार है तो वह तमिलनाडु की सरकार है: अमित शाह

पुदुक्कोट्टई । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई में 'तमिलगम थलाई निमिरा तमिलनिन पायनम यात्रा' के समापन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा...

वारिस पठान का संघ पर वार फिर सवाल, क्या प्यार करने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत है?

मुंबई । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ‘लव जिहाद’ संबंधी बयान पर सियासत तेज हो गई है। एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने इस बयान को भ्रामक करार देते हुए भाजपा...

admin

Read Previous

ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी से भड़कीं डेनमार्क की पीएम, बोलीं-ट्रंप धमकी देना बंद करें

Read Next

एसआईआर पर अखिलेश यादव का बयान तथ्यहीन : मंत्री जयवीर सिंह

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com