तिरुवनंतपुरम । केरल विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के नामांकन पत्र को मंगलवार को मंजूरी मिल गई, जिससे उनके चुनावी हलफनामे में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर विराम लग गया है। यह फैसला चुनाव से पहले भाजपा के लिए अहम बढ़त माना जा रहा है।
नामांकन की जांच प्रक्रिया बिना किसी आपत्ति के पूरी होने के बाद चुनाव अधिकारियों ने चंद्रशेखर की उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दी। इससे साफ संकेत मिलता है कि लगाए गए आरोप अयोग्यता के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस ने हाल ही में उन पर बेंगलुरु में एक महंगी रिहायशी संपत्ति छिपाने का आरोप लगाते हुए हमला तेज किया था।
इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर ने कांग्रेस को चुनौती दी कि यदि उसके पास ठोस सबूत हैं तो वह कानूनी कार्रवाई करे। उन्होंने कांग्रेस पर झूठ फैलाकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता ने केरल के मंत्री वी. शिवनकुट्टी पर भी निशाना साधा, जो नेमोम सीट से उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं और लगातार उनकी आलोचना कर रहे हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि बार-बार आरोप लगाना राजनीतिक असंतुलन को दर्शाता है।
कांग्रेस ने भारतीय चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि चंद्रशेखर ने लगभग 200 करोड़ रुपये मूल्य की बेंगलुरु संपत्ति का खुलासा नहीं किया और अपने हलफनामे में खुद को घर का मालिक नहीं बताया। पार्टी ने टैक्स भुगतान रसीदों सहित दस्तावेज पेश कर उनकी अयोग्यता की मांग की थी।
हालांकि, अब नामांकन स्वीकृत होने के बाद इस मामले के तत्काल कानूनी और चुनावी असर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विवाद भले ही चुनावी मुद्दा बना रहे, लेकिन प्रशासनिक मंजूरी से भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है और अब मुकाबला फिर से मुख्य चुनावी मुद्दों पर केंद्रित हो सकता है।
गौरतलब है कि मई 2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर को शशि थरूर से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन नेमोम विधानसभा क्षेत्र में उन्हें बढ़त मिली थी, जिससे उनके समर्थक उत्साहित हैं।
–आईएएनएस











