नयी दिल्ली देश के प्रतिष्ठित नालंदा अन्तर्राष्ट्रिय विश्विद्यालय ने भारत की प्राचीन परंपरा को रेखाँकित करते हुए अपनी शिक्षा पद्धति में शास्त्रार्थ पर जोर दिया है और लिखित परीक्षा में तीस प्रतिशत की कटौती की है।इस माह होने वाले दीक्षांत समारोह में दो दिन तक शाश्त्रार्थ होगा है।
यह जानकारी नालंदा यूनिवर्सिटी के कुलपतिसचिन चतुर्वेदी ने आज यहां नालंदा डायलॉग समारोह में दी।
समारोह का उद्घटान संस्कृति एवम पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया।
श्री चतुर्वेदी ने कहा कि 19 मई को हमारे विश्विद्यालय में दीक्षांत समारोह होगा और 17 मई से 198 छात्रों के बीच शास्त्रार्थ शुरू होगा और लगातार 23 घण्टे तक चलेगा।
उन्होंने कहा कि हम इस बात पर जोर नहीं देते कि शास्त्रार्थ में कौन जीतता है और कौन हारता है।हमारी संस्कृति शास्त्रार्थ में विश्वास करती है और प्राचीन काल में नालंदा विश्विद्यालय में यह शास्त्रार्थ होता था,उसी परम्परा को हम फिर से जीवित करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि हमारे विश्व विद्यालय में 70 प्रतिशत छात्र विदेशी हैं और वे आसपास के 5 गांवों से जुड़े हुए हैं।वे वहां जाकर उनके जीवन परिवेश का अध्ययन करते हैं।
उन्होंने कहा कि नालंदा केवल विश्विद्यालय नहीं बल्कि वह एक विचार अवधारणा और
भावना है।
प्रसिद्ध लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि हमारी ज्ञान परम्परा केवल संस्कृत साहित्य में नहीं थी बल्कि जैन औरबौद्ध परम्परा में भी थी।
उन्होंने कहा कि हमें प्राचीन काल और वर्तमान काल के बीच समन्वय करना होगा केवल अतीत गान से कुछ नहीं होगा।
समारोह को बिहार के पूर्व मुख्य सचिव एवम लेखक त्रिपुरारी शरण ने भी सम्बोधित किया और देश की वर्तमान शिक्षा पद्दति की बेहतरी की बात की।
नालंदा डायलाग में पद्मविभूषण सोनल मान सिंह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सचिव सच्चिदानद जोशी नीति आयोग के पूर्व प्रमुख अमिताभ कांत आदि ने भी भाग लिया।
— इंडिया न्यूज स्ट्रीम











