उत्तर प्रदेश में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने और न देने दोनो को लेकर विरोध और सियासत जारी है।पूर्व मुख्यमंत्री को अंतिम विदाई देने के लिए, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं के नहीं आने पर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दोनों ही दलों पर निशाना साधा है।
वहीं दूसरी तरफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के उप-कुलपति (वीसी) तारिक मंसूर ने कल्याण सिंह के निधन पर शोक जताया तो यूनिवर्सिटी में कई जगह पोस्टर चस्पा कर इसे गलत बताते हुए इसका विरोध किया गया है।
भाजपा में पिछड़े वर्ग का चेहरा व हिंदुत्व के कद्दावर नेता कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि नहीं देने के मुद्दे के ज़रिए,भगवा पार्टी पिछड़े समाज के वोट बैंक को साधने में भी जुट गई है।पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज जैसे पिछड़ी जातियों से आने वाले बड़े नेताओं ने कांग्रेस और सपा पर तुष्टिकरण और मुस्लिम वोटों के लालच में कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि नहीं देने का आरोप लगाया है।
इन नेताओ का कहना है कि सपा और कांग्रेस ने कल्याण सिंह को श्रधांजलि न देकर, पिछड़े वर्ग का अपमान का किया है, 2022 के चुनावों में प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी।स्वतंत्र देव सिंह ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर सपा प्रमुख से अपनी नाराज़गी का इज़हार किया।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि,अखिलेश यादव अपने आवास से मात्र 01 किलोमीटर दूर मॉल एवेन्यू में ‘बाबूजी’ को श्रद्धांजलि देने नहीं जा सके। कहीं मुस्लिम वोट बैंक के मोह ने उन्हें पिछड़ों के सबसे बड़े नेता को श्रद्धांजलि देने से तो नहीं रोक लिया?
पूर्व मुख्यमंत्री को श्रधांजलि नहीं देने पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि कल्याण सिंह ने लगातार छह दशक तक प्रदेश में जन-नेता के रूप में काम किया।उनके निधन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती सहित तमाम नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित दी है।
लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह और अखिलेश यादव, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित करने नहीं गए। जबकि समाजवादी के संस्थापक मुलायम सिंह, उन्हें अपना मित्र बताते थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका भी कल्याण को श्रद्धांजलि अर्पित करने नहीं पहुंचे।
उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज ने भी मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर निशाना बनाते हुए कहा है कि, एक वर्ग विशेष के वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण कल्याण सिंह को इन नेताओ द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की गई।ये पिछड़े समाज और दलित वर्ग का अपमान है।उन्होंने विपक्षी सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से कहा है कि अगर उनके अंदर नैतिकता है तो वो राष्ट्र से क्षमा मांगें नहीं तो उनको आने वाले चुनाव में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
उधर एएमयू कई जगह पोस्टर चस्पा किए गए हैं। इनमें वीसी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर संवेदना और शोक जताए जाने को शर्मनाक बताया गया है। जबकि एएमयू प्रशासन ने तत्काल इन पोस्टरों को हटा दिया है और इसे शरारती तत्वों की करतूत बताया है।
इन पोस्टर में लिखा था कि यह एएमयू की संस्कृति के ख़िलाफ़ वीसी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर शोक संवेदना प्रकट करें। यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।यह बेहद शर्मनाक ही नहीं, बल्कि यह एएमयू की परंपरा और संस्कृति के भी खिलाफ है।
कल्याण सिंह न सिर्फ बाबरी मस्जिद गिराने के अपराधी थे, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उन्होंने उल्लंघन किया था।अलीगढ़, आंदोलन न्याय और निष्पक्षता में विश्वास रखता है।
हालाँकि एएमयू का कहना है पोस्टरों से छात्रों से कोई लेना देना नहीं है बल्कि कुछ बाहरी अराजक तत्वों का काम है, जो यूनिवर्सिटी के माहौल खराब करना चाहते हैं।यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर प्रोफेसर वसीम अली ने मीडिया को बताया कि यूनिवर्सिटी में कई जगह यह पोस्टर लगे मिले थे। जिन्हें हटवा दिया गया है।
विवादित पोस्टरो को लेकर सपा नेता अनुराग भदौरिया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावो को नज़दीक आता देख योगी सरकार अपने काम को बताने के बजाय,जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाने के लिए भाजपा नफरत की राजनीति कर रही है।
उल्लेखनीय है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को ट्वीटर पर एक पोस्ट के ज़रिए श्रद्धांजलि दी थी।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का बीते शनिवार रात 9 बजे 89 वर्ष की आयु में लखनऊ में निधन हो गया था। कल्याण सिंह 48 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। पूर्व मुख्यमंत्री का अंतिम संस्कार सोमवार को बुलंदशहर में नरौरा स्थित गंगा किनारे घाट पर किया गया था।उनको श्रधांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमितशाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे।
क्यूँकि की 28 साल पहले 06 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस कल्याण सिंह के कार्यालय में ही हुआ था।इसलिए वह भगवा राजनीति के क़द्दावर नायक के रूप में देखे जाते थे।इसके अलावा वह लोध समुदाय जिसकी आबादी प्रदेश में क़रीब 07 प्रतिशत है, का भाजपा में चेहरा भी माने जाते थे। भाजपा कल्याण के दिवंगत होने पर उनको श्रधांजलि नहीं देने वाले दलों को हिंदुत्व व पिछड़े समाज विरोधी बताकर, आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है।











