नई दिल्ली : विधि आयोग द्वारा कल देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के बारे में लोगों के विचार आमंत्रित के जाने से देश में एक बार फिर से ताज़ा बहस छिड़ गई है। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार वर्षों से बीच-बीच में समान नागरिक संहिता लागू करने के मुद्दे उठाते रहे हैं और अब विधि आयोग ने एक बार फिर एक अधिसूचना जारी करएक महीने के भीतर उनसेउनकी राय मांगी है
गौरतलब है कि पिछले विधि आयोग ने भी जनता से उनकी राय मांगी थी लेकि 3 साल गुजर जाने के बाद भी उस अपीलपर कोई कार्रवाई नहीं हुई ।इस बीच गुजरात सरकार उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए अपनी समितियां गठित की है।
यह माना जाने लगा है कि समान नागरिक संहिता राज्यों में जब लागू हो जाएगीतो देश में ध्रुवीकरण होगा औरशान्ति का माहौल भंग हो जाएगा। इस्समय देश में गोवा एकमात्र राज्य है जहां संहिता पहले से लागू है ।कांग्रेस का कहना है कि समान नागरिक संहिता के जरिए देश में हिंदू और मुसलमानों के बीच में ध्रुवीकरण होगा और यह देश के लिए अच्छा नहीं होगा बल्कि नुकसान होगा।
सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के लोग कल के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देरहेहैं।
कल विधि मंत्रालय ने यह अधि सूचना जारी की किकोई भी नागरिक सदस्य सचिव ,विधि विभाग को ईमेल कर अपनी राय जाहिर कर सकता है और इस संबंध में कोई वर्किंग पेपरभी देसकता है। 2018 में विधि आयोग ने दो वर्किंग पेपेरतैयार किएतबे।
सरकार चाहे तो उसे विचार बहस के लिए आमंत्रित भी कर सकती है
यह सूचना प्रसारित होते ही देश में खलबली मच गई है और दोनों धर्मों के लोग इसे अपने अपने तर्कों से लागू करने याविरोध करने के मुद्दे पर आमने सामने आ गए हैं ।नागरिक संहिता के लागू होने से देश में शरीयत कानून पर रोक लग जाएगी और तीन तलाक का नियम स्वतः भंग हो जाएगा। समान नागरिक संगीता के तहत सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह तलाक गोद लेने संपत्तिएवम उत्तराधिकार अधिकार आदि में एकरूपता आ जाएगी और कानूनी भेदभाव खत्म हो जाएगा।
––इंडिया न्यूज स्ट्रीम











