इस्लामाबाद । पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की आंखों के उपचार से उनकी पार्टी संतुष्ट नहीं है। यही वजह है कि पीटीआई ने बुधवार को देश की सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर की। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने और उनके निजी चिकित्सकों से सलाह लेने की इजाजत देने की मांग की गई। स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी।
पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीआई के वकील सरदार लतीफ खोसा ने सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी इमरान खान को फॉलो-अप इलाज के बाद दाखिल की। यह अर्जी इमरान खान की तरफ से फाइल की गई थी और इस्लामाबाद जिला चुनाव आयुक्त को प्रतिवादी बनाया गया है, क्योंकि इसमें तोशखाना केस का जिक्र किया गया है जिसमें पूर्व पीएम को पहली बार (2022 में) गिरफ्तार किया गया था।
अपनी अर्जी में, इमरान खान ने सिफारिश की है कि उन्हें रेटिना विशेषज्ञ से इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाए। अर्जी में अनुरोध किया गया है कि इमरान खान को उनके निजी चिकित्सक फैसल सुल्तान और डॉ. आसिम यूसुफ से परामर्श लेने की इजाजत दी जाए और वे “जांच और इलाज की सभी प्रक्रियाओं से जुड़े रहें।”
अर्जी में आगे कहा गया है, “यह भी सिफारिश की गई है कि याचिकाकर्ता के परिवार वालों को सही जानकारी दी जाए और उनके चेक-अप और इलाज के दौरान उनसे ठीक से मिलने दिया जाए।”
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में अनुरोध किया गया है कि इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट और चेकअप की हस्ताक्षरित कॉपी पीटीआई संस्थापक के वकील को दी जाए।
वकील को इमरान खान तक सही एक्सेस देने की भी गुजारिश की गई है ताकि वे कोर्ट में उनका ठीक से प्रतिनिधित्व कर सकें और याचिकाकर्ता को पूरा इंसाफ मिल सके। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिटीशन में खोसा ने कहा कि इमरान खान 73 साल के हैं, और “उनकी बढ़ती उम्र और गिरती सेहत न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे पाकिस्तान के लिए भी बड़ी चिंता की बात है।”
उन्होंने कहा कि इमरान खान के परिवार या दूसरे चिकित्सकों के साथ जानकारी शेयर किए बिना सीक्रेट तरीके से मेडिकल जांच करने से गंभीर आशंकाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने आगे कहा, “पीआईएमएस अस्पताल में याचिकाकर्ता की मेडिकल जांच और/या प्रक्रिया के नतीजे के बारे में कुछ भी पता नहीं है। रहस्य बरतने का ये तरीका हैरान करने वाला है और किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”
जनवरी में इमरान खान की आंख की बीमारी, राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ), के बारे में खबरें सामने आईं। उनकी आंखों की रोशनी लौटाने को लेकर पहली प्रक्रिया 24 जनवरी को हुई थी, लेकिन सरकार ने पांच दिन बाद इसकी जानकारी दी।
तब से, विपक्ष ने सरकार पर इस मामले में पारदर्शिता की कमी और इमरान खान के लिए सही इलाज मुहैया न कराने और उन्हें अपने निजी चिकित्सकों से सलाह न लेने देने का आरोप लगाया है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
–आईएएनएस











