नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा की गुणवत्ता तथा शोध एवम अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कालेजों को अधिक स्वायत्तता देने का विश्विद्यालय अनुदान आयोग और दिल्ली विध्विद्यालय से आह्वान किया है ।
श्री प्रधान ने कल शाम दिल्ली विश्विद्यालय के वेंटकेश्वर कॉलेज की हीरक जयंती समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने इस अवसर पर समारोह में
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक पद्मश्री डॉक्टर रणदीप गुलेरिया और सुप्रसिद्ध नृत्यांगना बहनों पद्मश्री नलिनी कमलिनी को सम्मानित किया । ये दोनों प्रसिद्ध नृत्यांगनाएं इस कॉलेज की पूर्व छात्रा रह चुकी हैं ।गौरतलब है कि संविधान सभा की सदस्य एवं प्रमुख संता सेनानी दुर्गाबाई देशमुख ने इस कॉलेज की स्थापना की थी तथा उपराष्ट्रपति डॉक्टर राधाकृष्णन ने इस कॉलेज के वर्तमान परिसर की आधारशिला रखी थी।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने समारोह को संबोधित करते हुए देश में शिक्षा के विकास के लिए एवं अनुसंधान शोध एवं अनुसंधान पर दिया और यूजी सी तथा डीयू से कहा कि वे कालेजों को अधिक स्वयत्तता प्रदान करें ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार बढ़े तथा छात्रों का आदान प्रदान भी हो सके।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मकसद छात्रों को विश्व नागरिक बनाना है जिसकी जड़ें अपनी संस्कृति में धंसी हों और विध्वकल्याण में आस्था हो।
उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक शिक्षा से पूरी तरह मुक्त करने का भी आह्वान किया और कहा कि नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
.उन्होंने वेंकटेश्वर कॉलेज के योगदान की चर्चा करते हुए आशा व्यक्त कि यह कालेज ज्ञान आधारित समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगा और इसके छात्र राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व प्रदान करेंगे।
उन्होंने तिरुपति तिरुमला शिक्षा संस्थान के योगदान की भी सराहना की जो इस कॉलेज की संचालन समिति है ।
इस अवसर पर इस अवसर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के विकास पर भी बल दिया और शिक्षकों को वास्तविक गुरु बनने का आह्वान किया।
दिल्ली विश्विद्यालय के कुलपति डॉक्टर योगेश सिंह ने मूल्यों पर आधारित शिक्षा पर बल देते हुए राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका को आवश्यक बताया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रिंसिपल शीला रेड्डी ने बताया कि किस तरह उनके कालेज छात्रों को संस्कृत तेलगु तमिल के अलावा फ्रेंच जर्मन भाषाओं को पढ़ाने की सुविधा प्रदान की है।
–इंडिया न्यूज़ स्ट्रीम











