देश के 8 आईआईटी का आधारभूत ढांचा विलम्ब से बनने के कारण सरकार को 8 हज़ार करोड़ का चूना लगा है। सीएजी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से 19 के बीच इन आईआईटी के बारे में दिसम्बर में यह रिपोर्ट पेश की गई है।
भुवनेश्वर आईआईटी, गांधीनगर, हैदराबद, इंदौर, जोधपुर, मंडी, पटना और रोपड़ की आईआईटी के बारे में सीएजी ने यह रिपोर्ट पेश की है। इन आईआईटी की स्थापना 2008 -09 में हुई थी।
शिक्षा मंत्रालय ने 08 से 14 के बीच 18880 छात्रों के दाखिले के लक्ष्य रखा था लेकिन आधारभूत ढांचा विकसित होने में विलम्ब से केवल 6224 छात्रों ने दाखिल लिया। इतना ही नहीं बुनियादी ढांचा विकसित होने में 6 साल की जगह 13 साल लग गए जिससे लागत में 136 प्रतिशत वृद्धि हुई। इस तरह निर्माण कार्य मे विलम्ब के कारण 6 080 करोड़ की जगह 14322 करोड़ रुपए का बजट हो गया।।
रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर, गांधीनगर, मंडी और रोपड़ आईआईटी के लिए भूमि आवंटन और ट्रांसफर में बार बार अड़चनें आईं।
रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी ने 2014 से 2019 के बीच बहुत सारे पेटेंट के लिए आवेदन किये पर 5 आईआईटी में कोई पेटेंट भी नहीं हो सका।











