आरएसएस समर्थित शोध निकाय ने संभावित तीसरी कोविड लहर से बचने के उपाय सुझाए

नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)| आरएसएस समर्थित अकादमिक शोध संगठन रिसर्च फॉर रिसर्जेंस फाउंडेशन (आरएफआरएफ) ने कोविड महामारी की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर श्रमिकों की आजीविका की रक्षा के लिए औद्योगिक क्षेत्र की गतिविधियों की मैपिंग की सिफारिश की है। ‘कोविड थर्ड वेव एंड बियॉन्ड : एक्शन प्लान फॉर प्रिपेयरनेस’ शीर्षक वाली रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और कोविद के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) को सौंपी गई थी। नागपुर स्थित आरएफआरएफ,आरएसएस के भारतीय शिक्षण मंडल की अकादमिक शोध शाखा है।

आरएफआरएफ के महानिदेशक राजेश बीनीवाले ने कहा, “महामारी की संभावित तीसरी लहर के दौरान असंगठित क्षेत्रों में श्रमिकों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।”

बीनीवाले ने कहा कि आरएफआरएफ ने यह भी सिफारिश की है कि संबंधित उद्योगों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा मजदूरों के बड़े पैमाने पर पलायन को कम करने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है।

बीनीवाले ने कहा, “कोविड प्रोटोकॉल और वित्तीय सहायता के साथ निरंतर गतिविधि की रणनीतियों का मिश्रण अपनाया जा सकता है। आरएफआरएफ ने यह भी सुझाव दिया कि कर लाभ उद्योगों को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि श्रमिकों की अर्थव्यवस्था का समर्थन किया जा सके।”

भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय आयोजन सचिव मुकुल कनिताकर ने कहा कि स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष एकीकरण, प्रीडिक्टिव मॉडलिंग, आर्थिक मुद्दे, सतत पहलुओं और कीटाणुशोधन उपकरणों के माध्यम से संभावित सुरक्षा जैसे 11 विभिन्न पहलुओं पर सिफारिशों को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

कनिताकर ने कहा कि रिपोर्ट एक स्वतंत्र थिंक-टैंक द्वारा तैयार की गई है।

उन्होंने कहा, “रिपोर्ट को नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों के बीच इसके संभावित प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रसारित किया जा रहा है।”

स्वास्थ्य चुनौतियों की प्रतिक्रिया में सुधार के लिए, रिपोर्ट ने कोविड के बाद की स्वास्थ्य जटिलताओं की शीघ्र पहचान और अधिसूचना, उम्र, लिंग, सामाजिक-आर्थिक पैटर्न आदि पर प्रचलित आंकड़ों के आधार पर महामारी विज्ञान को अद्यतन करने की सिफारिश की।

शिक्षा क्षेत्र के लिए, रिपोर्ट ने सिफारिश की है कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए ऑनलाइन/ऑफलाइन कक्षाओं के लिए अलग-अलग रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है, “प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए टीवी चैनलों जैसे जनसंचार माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा के लिए, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की संभावनाओं का सुझाव देने वाले दिशानिर्देश दस्तावेज यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा तैयार किए जा सकते हैं।”

–आईएएनएस

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