नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अब अगर किसी छात्र ने धरना दिया उसे 20 हजार से 30 हजार रुपए का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा कैंपस, हाॅस्टल, क्लासरूम में तोड़फोड़, मारपीट या हिंसा पर दाखिला रद्द हो जाएगा।
जेएनयू एक्ट 2023 संशोधित 3 फरवरी से लागू हो चुके हैं। इसमें छह बिंदुओं पर छात्रों के लिए नए नियम निर्धारित किए गए हैं। यह नियम फुल टाइम डिग्री प्रोग्राम के अलावा शॉर्ट टाइम कोर्स वाले सभी छात्रों पर लागू होंगे। जेएनयू प्रशासन की ओर से बुधवार देर शाम जेएनयू एक्ट 2023 जारी किया गया है। यदि कोई छात्र कैंपस में धरना और हिंसा करता पाया जाता है तो उसे 20 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना और प्रवेश रद्द का प्रावधान किया गया है।
आज से लागू हुए नियम
जेएनयू संशोधित एक्ट 2023 के 10 पन्नों में ‘जेएनयू के छात्रों के अनुशासन और उचित आचरण के नियम’ में विभिन्न प्रकार के कृत्यों जैसे विरोध और जालसाजी के लिए दंड और प्रॉक्टोरियल जांच और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, नियम 3 फरवरी को लागू हुए हैं। जेएनयू कैंपस में अक्सर विरोध धरना, प्रदर्शन और मारपीट व हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं। इसी कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्ती से निपटने को लेकर जेएनयू एक्ट में संशोधन किया है। यह नए नियम कार्यकारी परिषद द्वारा अनुमोदित किए हैं, जोकि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। दस्तावेज में कहा गया है कि नियम विश्वविद्यालय के सभी छात्रों पर लागू होंगे, जिनमें अंशकालिक छात्र भी शामिल हैं, चाहे इन नियमों के शुरू होने से पहले या बाद में प्रवेश दिया गया हो। जेएनयू कैंपस में अब कोई भी बबाल किया तो उसकी शिकायत संबंधित छात्र के माता-पिता को भेजी जाएगी। इसका मकसद छात्र की सभी जानकारियां पेरेंट्स को देना है, ताकि वे अपने बच्चे को समझाकर भेजे कि कैंपस में सिर्फ पढ़ाई करनी है।
नए नियमों में हिंसा और जबरदस्ती के सभी कृत्यों जैसे घेराव, धरना-प्रदर्शन या किसी भी भिन्नता के लिए दंड का प्रस्ताव किया है, जो सामान्य शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज को बाधित करता है।
इसके अलावा कोई भी कार्य जो हिंसा को उकसाता है या उसकी ओर ले जाता हो। नए नियमों में शिक्षकों और छात्रों दोनों से जुड़े मामलों को विश्वविद्यालय, स्कूल और केंद्र स्तर की शिकायत निवारण समिति को भेजा जाएगा। यौन शोषण, छेड़खानी, रैगिंग और सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने वाले मामले चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय के दायरे में आते हैं।











