जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल ने प्रोफेसर के तौर पर राजदूत वेणु राजामोनी की नियुक्ति की

सोनीपत (हरियाणा) , 3 अगस्त (आईएएनएस)| संस्थागत उत्कृष्टता के लिए अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए, ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने अपने अकादमिक समुदाय के लिए एक और प्रतिष्ठित प्रोफेसर की भर्ती की है। राजदूत वेणु राजामोनी जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में डिप्लोमैटिक प्रैक्टिस के प्रोफेसर के रूप में शामिल होंगे। 34 वर्षों के अनुभव के साथ एक कैरियर राजनयिक, विद्वान और पूर्व पत्रकार, वेणु राजामोनी एक प्रसिद्ध सार्वजनिक वक्ता, लेखक, कला एवं संस्कृति के संरक्षक हैं। राजामोनी 2017 से 2020 तक नीदरलैंड में भारत के राजदूत थे। वह हेग में रासायनिक हथियारों के निषेध संगठन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि भी थे और वह अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय और मध्यस्थता के स्थायी न्यायालय के साथ भारत के संबंधों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

राजदूत राजमोनी ने महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, केरल से एलएलबी की डिग्री और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है।

नीदरलैंड में राजदूत राजामोनी के कार्यकाल में कई उच्च स्तरीय यात्राओं और भारत के प्रोफाइल को बढ़ाने के लिए अनूठी पहल की गई। इनमें एम्स्टर्डम की नहरों में बॉलीवुड ऑन ए बोट नामक एक पर्यटन प्रोत्साहन पहल और एम्बेसडर हाउस का उद्घाटन शामिल है।

इसके अलावा इसमें एम्स्टर्डम के म्यूजियमप्लिन और डैम स्क्वायर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को चिह्न्ति करने के लिए कल्याण उत्सव (वेसनेस फेस्टिवल), हेग शहर में वार्षिक गांधी मार्च और अहिंसा के संदेश का प्रसार करने वाले स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक आउटरीच कार्यक्रम भी शामिल है।

मॉरीशस से चागोस द्वीपसमूह के पृथक्करण के कानूनी परिणामों के संबंध में सलाहकार राय के मामले में राजदूत राजमोनी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष भारत की ओर से पेश हुए थे। वह जाधव मामले (भारत बनाम पाकिस्तान) में आईसीजे के समक्ष भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य रहे और स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के समक्ष एनरिका लेक्सी मामले (इटली बनाम भारत) में भारत के सह-एजेंट भी रहे।

नीदरलैंड में इस कार्यकाल के दौरान राजदूत राजामोनी ने दो पुस्तकें लिखीं – व्हाट वी कैन लर्न फ्रॉम द डच – रिबिल्डिंग केरल पोस्ट 2018 फ्लड एंड इंडिया एंड द नीदरलैंड्स – पास्ट, प्रेजेंट एंड फ्यूचर। उत्तरार्ध सितंबर 2019 में डच किंग हिस रॉयल हाइनेस विलेम-अलेक्जेंडर द्वारा जारी की गई थी और भारत और नीदरलैंड के बीच क्रॉस-सांस्कृतिक मुठभेड़ के एक विश्वकोश के रूप में इसने प्रशंसा भी हासिल की।

पुस्तक व्हाट कैन वी लर्न फ्रॉम द डच – रीबिल्डिंग केरल पोस्ट 2018 फ्लड का विमोचन जनवरी 2019 में किया गया था। यह इतिहास पर बाढ़ के प्रति डच प्रतिक्रिया, जल प्रबंधन में उनके नवाचारों और भारत में केरल राज्य द्वारा सीखे गए सबक का वर्णन करती है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा जनवरी 2021 में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी की उपस्थिति में – प्रलयम, प्रतिरोधाम, पुनर्निर्मणम – पदिककम डच पडंगल नामक पुस्तक का एक मलयालम अनुवाद जारी किया गया था।

राजदूत राजमोनी ने 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के प्रेस सचिव का पद संभाला। वह जापान के सम्राट अकिहितो, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसे अतिथि नेताओं के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मुखर्जी की टीम का हिस्सा थे।

इसके अलावा वह चीन, रूस, इजरायल, बांग्लादेश और वियतनाम सहित 20 देशों की राजकीय यात्राओं के दौरान राष्ट्रपति मुखर्जी के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। वह राष्ट्रपति के साथ भारत के भीतर 100 से अधिक आधिकारिक दौरों पर भी गए।

राजमानी ने 2010-2012 तक भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बहुपक्षीय संस्थान प्रभाग के संयुक्त सचिव और प्रमुख के रूप में कार्य किया। वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक और कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष के लिए भारत की नीतियों को तैयार करने के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने भारत को लगभग 34 अरब डॉलर (140 से अधिक परियोजनाओं में फैली) की बाहरी सहायता का पर्यवेक्षण किया। वह अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ में भारत के उप और आईएमएफ की अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय समिति की वसंत और शरद ऋतु की बैठकों और विश्व बैंक समूह की विकास समिति के साथ-साथ एडीबी की वार्षिक आम बैठकों में भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे हैं।

2007 से 2010 तक दुबई में भारत के महावाणिज्य दूत के रूप में राजामोनी के कार्यकाल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंधों में एक उच्च बिंदु को चिह्न्ति किया। उन्हें 20 लाख से अधिक भारतीयों के कल्याण को आगे बढ़ाने, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, संयुक्त अरब अमीरात के नागरिकों तक पहुंचने और भारत की छवि और सॉफ्ट पावर को बढ़ाने के उनके प्रयासों के लिए बहुत प्रशंसा मिली।

उन्होंने दुबई में भारत और यूएई : इन सेलिब्रेशन ऑफ ए लेजेंडरी फ्रेंडशिप नामक कॉफी टेबल बुक के प्रकाशन के साथ अपना कार्यकाल पूरा किया। पुस्तक का एक मलयालम वर्जन (संस्करण) 2013 में केरल में जारी किया गया था और अरबी वर्जन 2014 में संयुक्त अरब अमीरात में प्रकाशित हुआ था।

राजमोनी ने हांगकांग, बीजिंग, जिनेवा और वाशिंगटन डीसी में भारतीय मिशनों में भी काम किया। उन्होंने 2003 से 2005 तक विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के शेफ डे कैबिनेट के रूप में काम किया और वह वाशिंगटन डीसी में 2001 और 2002 के बीच सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में एशिया फाउंडेशन फेलो भी रहे।

उन्होंने सीएसआईएस में अपनी फेलोशिप के दौरान एक मोनोग्राफ – द इंडिया-चाइना-यूएस ट्राएंगल : ए सॉफ्ट बैलेंस ऑफ पावर इन द मेकिंग लिखा। वह चीनी भाषा में भी पारंगत हैं, जिसका उन्होंने हांगकांग विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। इसके साथ ही राजामोनी तमिल, हिंदी, मलयालम और फ्रेंच में भी कुशल हैं।

विदेश सेवा से पहले, राजामोनी 1983 से 1986 तक राष्ट्रीय दैनिक इंडियन एक्सप्रेस के कोच्चि संवाददाता भी रह चुके हैं।

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने राजदूत राजामोनी का स्वागत करते हुए कहा, “हम जेजीयू में राजदूत राजमोनी को लेकर बहुत उत्साहित हैं, क्योंकि उनका विशाल अनुभव विश्वविद्यालय में शिक्षण और सीखने की गुणवत्ता और विविधता को समृद्ध करेगा। वह अपने साथ कानून, अंतराष्र्ट्ीय संबंधों, कूटनीति और बहुपक्षवाद में उत्कृष्ट अनुभव लेकर आए हैं। उनके विविध करियर पथ उन्हें संस्थान निर्माण और अकादमिक उत्कृष्टता में अपना योगदान देने में सक्षम बनाएंगे। यह जेजीयू के छात्रों के लिए उनके समृद्ध अनुभव और ज्ञान से सीखने का एक असाधारण अवसर होने जा रहा है।”

इस अवसर पर राजदूत वेणु राजामोनी ने कहा, “मुझे जेजीयू में शामिल होने की खुशी है, जिसे भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में घोषित किया गया है और भारत के सर्वश्रेष्ठ निजी विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। मेरा मानना है कि जेजीयू विश्वविद्यालयों की भूमिका की फिर से कल्पना करने में सबसे आगे है और अंत:विषय, अभिनव शिक्षाशास्त्र, बहुलवाद, छात्रवृत्ति, वैश्विकता और अंतराष्र्ट्ीय जुड़ाव के अपने मूल मूल्यों को लेकर भी अग्रसर है। जेजीयू की प्रतिभा को पोषित करने में एक प्रमुख भूमिका है, जो भारत को दुनिया के अग्रणी देशों की श्रेणी में ले जा सकती है और मैं इस प्रयास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का इरादा रखता हूं।”

–आईएएनएस

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