अब डीयू में “हिन्दू अध्ययन” की पढ़ाई एम ए की डिग्री मिलेगी

नई दिल्ली : दिल्ली विश्विद्यालय में अब हिन्दू अध्ययन केंद्र खुलेगा और इस विषय में एम ए की पढ़ाई होगी।

दिल्ली विश्विद्यालय की एकेडमिक काउंसिल ने कल अपनी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

डीयू ईसी की 1266वीं बैठक में
2022-2047 के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय का स्ट्रैटेजिक प्लान किया पेश किया गया।
इसके साथ ही बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई और उन्हें पारित किया गया।
कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बतायाकि हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना को भी ईसी की बैठक में पारित कर दिया गया। हिंदू अध्ययन केंद्र के तहत हिंदू अध्ययन में मास्टर ऑफ आर्ट्स प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।
इसके अलावा स्वतंत्रता और विभाजन अध्ययन केंद्र व जनजातीय अध्ययन केंद्र को भी मिली मंजूरी ।
विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल की 1014वीं बैठक में पारित किए गए स्वतंत्रता और विभाजन अध्ययन केंद्र को स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत कर लिया गया।
इस केंद्र द्वारा शोध के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे अज्ञात नायकों और घटनाओं पर भी काम होगा जिन्हें इतिहास में अभी तक स्थान नहीं मिला है।
इसके साथ ही भारत विभाजन की त्रासदी के दौरान की घटनाओं पर भी गहनता से अध्ययन एवं शोध होगा। इसके अलावा जनजातीय अध्ययन केंद्र के गठन को भी मंजूरी मिल गई है। यह एक बहु-अनुशासनात्मक केंद्र होगा जिसमें भारत की विभिन्न जनजातियों पर अध्ययन होगा।
उन्होंने बताया कि डीयू में पीएचडी के लिए छात्रों का दाखिला
उन्होंने बताया कि पीएचडी में दाखिला अब सीयूईटी (पीएचडी)-2023 के आधार पर होगा। पीएचडी प्रवेश
अकादमिक परिषद की स्थायी समिति की सिफारिश के आधार पर स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के एडमिशन और अटेंडेंट से संबंधित विभिन्न मामलों पर विचार-विमर्श के उपरांत उन्हें भी कार्यकारी परिषद द्वारा स्वीकार किया गया।
इनके तहत शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए पीएच.डी. प्रवेश परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय-आधारित सीयूईटी (पीएचडी)-2023 के माध्यम से होगा। हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय में सेवारत शिक्षक और गैर-शिक्षण वर्ग सीधे साक्षात्कार के लिए उपस्थित हो सकते हैं।
शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कार्यालय समय के दौरान निर्धारित कर्तव्यों को प्रभावित किए बिना कक्षाओं में भाग लेने और परीक्षा देने की अनुमति दी जा सकती है। पीएचडी के लिए ये नियम शैक्षणिक सत्र 2023-2024 से लागू होंगे।

इसके अलावा 360 विद्यार्थियों के साथ शुरू होंगे बीटेक. प्रोग्राम ।
प्रौद्योगिकी संकाय (फ़ैकल्टि ऑफ टेक्नालजी) के वर्तमान विभागों के तहत कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बी.टेक. कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बी.टेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बी.टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के संचालन के लिए गठित समिति की संस्तुति को भी ईसी की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। गौरतलब है कि एनएसआईटी और दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के अलग से विश्वविद्यालय बन जाने के कारण डीयू में प्रौद्योगिकी के प्रोग्राम फिलहाल नहीं थे। अब डीयू को शिक्षा मंत्रालय द्वारा अपने प्रौद्योगिकी संकाय हेतु 72 शिक्षण एवं 48 गैर शिक्षण पदों के सृजन हेतु स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। हालांकि फिलहाल इन विभागों के तहत 14 शिक्षकों की नियुक्तियाँ ही की जाएगी। विदित रहे कि संचालन समिति ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 से तीन बीटेक प्रोग्राम शुरू करने की सिफारिश की है। इनके तहत कुल 360 विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा जिनमें प्रत्येक बी.टेक प्रोग्राम के लिए 120 विद्यार्थी होंगे। इन प्रोग्रामों के लिए प्रवेश जेईई मेन्स स्कोर के आधार पर दिया जाएगा। प्रोग्रामों के पहले दो सेमेस्टर की पाठ्यक्रम संरचना, क्रेडिट वितरण और पाठ्यक्रम तैयार हो चुके हैं।

शैक्षणिक सत्र 2023-24 से एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) आईटीईपी कोर्स चलाने को भी मंजूर कर लिया गया है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 4 वर्षीय कोर्स होगा। कुलपति ने बताया कि इससे पहले चल रहे शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोई भी कोर्स बंद नहीं किया जाएगा। श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला कॉलेज, माता सुंदरी महिला महाविद्यालय और जीसस एंड मैरी कॉलेज को सत्र 2023-2024 से एनसीटीई द्वारा आईटीईपी के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया है। डीयू का शिक्षा विभाग और बी.एल.एड पाठ्यक्रम चलाने वाले आठ कॉलेज आईटीईपी पाठ्यक्रम के लिए शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए आवेदन करेंगे।

कुलपति ने विश्वविद्यालय के स्ट्रैटेजिक प्लान को बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत सरकार के स्ट्रैटेजिक प्लान को ध्यान में रखते हुए डीयू ने भी अपना स्ट्रैटेजिक प्लान तैयार किया है कि अगले 25 वर्षों में हमें क्या करना है। इसके लिए देश को कैसे वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, इतिहासकार और नागरिक चाहिये होंगे और उसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की क्या भूमिका हो सकती है। इस सबको ध्यान में रखते हुए यह स्ट्रैटेजिक प्लान तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि स्ट्रैटेजिक प्लान एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जो मिशन-क्रिटिकल कार्य के लिए आवश्यक प्राथमिकताओं के प्रति प्रतिबद्धता बनाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है कि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण, टिकाऊ और जवाबदेह बना रहे। विश्वविद्यालय का स्ट्रैटेजिक विजन का उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लाभ प्रदान करने वाले एक प्रमुख बहु-विषयक गहन अनुसंधान विश्वविद्यालय के रूप में हमारी स्थिति को मजबूत करना है। उत्कृष्टता, नवाचार और उद्यमशीलता की भावना इसके मूल में होगी। ब्रांडिंग, संसाधन निर्माण, परोपकार और वैश्वीकरण के मुख्य मापदंडों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा और छात्रों का अनुभव, अनुसंधान, विश्वविद्यालय समुदाय, परिसरों और स्थानीय समुदाय के बीच कनेक्ट, अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योग के साथ सहयोग तथा वैश्विक प्रभाव जैसे छह लक्ष्यों के माध्यम से डीयू 2047 की परिकल्पना है। उन्होंने कहा कि अगले 20 वर्षों में हमें दुनिया के 100 टॉप विश्वविद्यालयों में शामिल होना है। उन्होने बताया कि यह विश्वविद्यालय का स्ट्रैटेजिक प्लान है। इसके स्वीकृत होने के पश्चात सभी कॉलेज और विभाग भी इसके आधार पर अपने अपने स्ट्रैटेजिक प्लान तैयार करेंगे।

–इंडिया न्यूज स्ट्रीम

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