फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट क्या होते हैं, इनमें क्या है अंतर? जानें क्यों है बजट में इनका खास महत्व

नई दिल्ली । आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर बाजार, निवेशक और आम नागरिक सभी की नजरें सरकार की वित्तीय स्थिति पर टिकी हुई हैं। बजट में टैक्स और खर्च की घोषणाओं के अलावा कुछ ऐसे अहम आंकड़े होते हैं, जो देश की आर्थिक सेहत को दर्शाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) और रेवेन्यू डेफिसिट (राजस्व घाटा) की होती है। इसलिए इनके बारे में हर किसी को जानना बेहद जरूरी होता है।

फिस्कल डेफिसिट का मतलब होता है सरकार के कुल खर्च और उसकी कुल आय (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर। सरल शब्दों में कहें तो यह बताता है कि सरकार को अपने खर्च पूरे करने के लिए कितनी राशि उधार लेनी पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर, अगर केंद्र सरकार एक साल में 50 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है, लेकिन टैक्स और अन्य स्रोतों से उसकी आय 35 लाख करोड़ रुपए होती है, तो फिस्कल डेफिसिट 15 लाख करोड़ रुपए होगा।

फिस्कल डेफिसिट बजट के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले आंकड़ों में से एक होता है, क्योंकि यह सरकार के वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। कम फिस्कल डेफिसिट यह संकेत देता है कि सरकार अपने खर्च और आय पर नियंत्रण रखे हुए है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।

वहीं ज्यादा फिस्कल डेफिसिट का मतलब ज्यादा उधारी, जिससे ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और निजी निवेश पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा यह तय करता है कि सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं और रक्षा पर खर्च करने के लिए कितनी गुंजाइश है।

सरकार फिस्कल डेफिसिट को मुख्य रूप से उधारी के जरिए पूरा करती है, जिसके लिए घरेलू बाजार में सरकारी बॉन्ड जारी किए जाते हैं। छोटी बचत योजनाओं और भविष्य निधि (पीएफ) से धन लिया जाता है और कुछ हद तक विदेशी उधारी भी की जाती है। आज की ज्यादा उधारी आने वाले वर्षों में ब्याज का बोझ बढ़ा देती है, जिससे भविष्य के बजट में विकास से जुड़े खर्चों के लिए जगह कम हो जाती है।

ज्यादा फिस्कल डेफिसिट हमेशा नकारात्मक नहीं माना जाता। आर्थिक सुस्ती, वैश्विक अनिश्चितता या महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों में सरकार का ज्यादा खर्च करना अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है। हालांकि, अगर लंबे समय तक फिस्कल डेफिसिट ऊंचा बना रहे, तो इससे सरकारी कर्ज बढ़ता है और महंगाई व ब्याज दरों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए सरकारें आमतौर पर मध्यम अवधि के लिए फिस्कल कंसोलिडेशन यानी घाटा कम करने का रोडमैप पेश करती हैं।

वहीं, रेवेन्यू डेफिसिट उस स्थिति को दर्शाता है जब सरकार का रोजमर्रा का खर्च उसकी नियमित आय से ज्यादा हो जाता है। इसे सरकार के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (राजस्व व्यय) और रेवेन्यू रिसीप्ट्स (राजस्व प्राप्ति) के बीच के अंतर के रूप में देखा जाता है। जब आय से ज्यादा खर्च होता है, तो रेवेन्यू डेफिसिट दर्ज किया जाता है।

रेवेन्यू रिसीप्ट्स में सरकार की टैक्स से होने वाली आय जैसे इनकम टैक्स, जीएसटी और कॉरपोरेट टैक्स, साथ ही नॉन-टैक्स आय जैसे सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड, फीस और ब्याज शामिल होते हैं। वहीं रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में वे खर्च आते हैं जिनसे कोई स्थायी संपत्ति नहीं बनती, जैसे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, सब्सिडी, रक्षा खर्च, कल्याणकारी योजनाएं और ब्याज भुगतान।

रेवेन्यू डेफिसिट की गणना सीधी होती है। उदाहरण के लिए, अगर सरकार का रेवेन्यू खर्च 30 लाख करोड़ रुपए है और रेवेन्यू आय 27 लाख करोड़ रुपए है, तो रेवेन्यू डेफिसिट 3 लाख करोड़ रुपए होगा। बजट में इसे आमतौर पर जीडीपी के प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है।

रेवेन्यू डेफिसिट सरकार की वित्तीय सेहत का अहम संकेतक माना जाता है। ज्यादा रेवेन्यू डेफिसिट यह दिखाता है कि सरकार निवेश के बजाय रोजमर्रा के खर्चों के लिए उधारी ले रही है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क और रेल जैसे पूंजीगत खर्चों के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो जाते हैं, जो लंबे समय की आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी होते हैं।

जब रेवेन्यू डेफिसिट होता है, तो सरकार को उस कमी को पूरा करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है, जिससे सार्वजनिक ऋण बढ़ता है। लंबे समय तक रेवेन्यू डेफिसिट बने रहने से भविष्य के बजट में ब्याज का बोझ बढ़ता है और निजी निवेश पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से बजट विश्लेषक इस बात पर खास नजर रखते हैं कि सरकार अपनी आय बढ़ाने और खर्चों को तर्कसंगत बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

–आईएएनएस

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के लिए मांगे आवेदन, आखिरी तारीख 11 मई

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के क्षेत्रों में बेहतरीन योगदान को पहचानने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी) 2026 के...

केंद्र ने कमर्शियल एलपीजी के आवंटन को बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया, अधिक श्रम उपयोग वाले क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर्स के आवंटन का कोटा बढ़ाकर कुल मांग का 70 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले 50 प्रतिशत था।...

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं, एक्साइज में कमी से होगी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई : केंद्र

नई दिल्ली । केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा और एक्साइज ड्यूटी में कमी को ग्राहकों को पास नहीं...

इजरायल-अमेरिका और ईरान में तनाव से तेल की कीमतों में आया उछाल, नेपाल-बांग्लादेश समेत अन्य देशों ने बढ़ाईं कीमतें

काठमांडू । दुनिया की अर्थव्यवस्था पर ईरान और अमेरिका-इजरायल हमले का असर दिखने लगा है। तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। कई देशों में तेल...

मध्य पूर्व तनाव का असर: निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 3 रुपए महंगा

नई दिल्ली । निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर...

डब्ल्यूटीओ मीटिंग : चीन के सस्ते सामान बाजार में डंप करने का मुद्दा उठाएगा ईयू

नई दिल्ली । यूरोपीय यूनियन के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा कमिश्नर मारोस सेफ्कोविक ने मीडिया को बताया कि यूरोपीय यूनियन इस हफ्ते वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) की मीटिंग में चीन...

पेट्रोल-डीजल की देश में कोई कमी नहीं, एलपीजी ऑनलाइन बुकिंग 92 फीसदी तक पहुंची : पेट्रोलियम मंत्रालय

नई दिल्ली । दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को लेकर मची हाहाकार के बीच भारत सरकार ने विश्वास दिलाया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी...

एलपीजी जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले में 155 गिरफ्तार, 642 एफआईआर दर्ज

नई दिल्ली । एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए राज्यों में कार्रवाई जारी है और अब तक करीब 642 एफआईआर दर्ज की गई हैं और करीब 155...

सरकार बैंकों, बीमा कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स में पड़े 73,000 करोड़ रुपए के अनक्लेम्ड फंड लौटाने के प्रयासों को तेज कर रही है: मंत्री

नई दिल्ली । सरकार ने बैंकों, बीमा कंपनियों और म्यूचुअल फंड में पड़े 73,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के अनक्लेम्ड (बिना दावे वाले) राशि को नागरिकों को वापस दिलाने के...

एयरटेल ब्रॉडबैंड से नोएडा के निवासी परेशान, पैसा देने के बाद भी नहीं मिल रही सर्विस

नई दिल्ली । एयरटेल ब्रॉडबैंड नोएडा के कुछ सेक्टर्स में अपनी खराब सर्विस को लेकर चर्चा में है। यूजर्स का कहना है कि पैसे देने के बाद भी बीते एक...

भारतीय शेयर बाजार में लौटी रौनक; सेंसेक्स 1,372 अंक चढ़कर बंद, निवेशकों ने कमाए करीब 8 लाख करोड़ रुपए

मुंबई । सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली और घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स 1.5 प्रतिशत...

ट्रंप के फैसले से तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट, गिफ्ट निफ्टी में जोरदार उछाल

नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा करने और दोनों देशों के बीच बातचीत के 'सकारात्मक' होने की...

admin

Read Previous

‘वंदे मातरम’ आजादी का मंत्र था, कांग्रेस ने कभी नहीं दिया महत्व: गिरिराज सिंह

Read Next

पश्चिम बंगाल : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com