फासीवाद और सम्प्रदायिकता के खिलाफ सांस्कृतिक अभियान कल होगा लांच

देश के 500 सौ से अधिक लेखकों और बुद्धिजीवियों द्वारा कल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74 वीं शहादत पर अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान जारी होगा। दस से अधिक लेखक संगठनों और जनसंगठनों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान देश मे विकराल होती साम्प्रदायिकता फासीवाद और सरकारी दमन अत्याचार के विरुद्ध शुरू किया जा रहा है जो साल भर तक चलेगा।

इस अभियान से जुड़े प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय के अनुसार कल इस अभियान को दिल्ली में एक ऑनलाइन कार्यक्रम के जरिये लांच किया जाएगा। इसमें प्रसिद्ध लेखक संस्कृति कर्मी अशोक वाजपेयी इस अभियान के बारे में उद्घाटन भाषण देंगे और गांधी जी की शहादत पर एक संगोष्ठी होगी जिसमें प्रसिद्ध गांधीवादी एवम गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, प्रसिद्ध मस्राठी लेखक राव साहब कस्बे सूर्यनारायण रणसुभे आदि लेंगे।

कार्यक्रम में भीमा कोरेगांव घटना के आरोप में तथा दिल्ली दंगे के आरोप में फँसाये गए लोगों को रिहा करने कर मांग से सम्बंधित एक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।

श्री राय ने बताया कि कल लखनऊ रांची इलाहाबाद में भी ऑनलाइन कार्यक्रम होंगे। आज भी प्रसिद्ध कवि एवम जनसंस्कृति मंच के संस्थापक गोरख पांडेय की स्मृति में कार्यक्रम हो रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना का संकट खत्म होते ही हम लोग एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन करेंगे जिसमे सभी भारतीय भाषाओं के लेखकों को आमंत्रित किया जाएगा।

इस अभियान में इप्टा, जनवादी लेखक संघ प्रगतिशील लेखक संघ जन संस्कृति मंच दलित लेखक संघ अखिल भारतीय दलित महिला लेखक संघ जन नाट्य मंच लिखावट संगवारी समेत कई संगठन शामिल हैं। जिसमे और संगठनों को जोड़ा जाएगा। हिंदी उर्दू के नामी गिरामी लेखकों शायरों की स्मृति में यह अभियान कार्यक्रम कर जनता की आवाज उठाएगा। इस अभियान में लेखकों का मार्च सम्मेलन कविता पाठ रचना पाठ नाट्य मंचन पोस्टर संगोष्ठी आदि आयोजित होंगे और पत्रिकाओं के प्रतिरोध साहित्य अंक निकाले जाएंगे।

लेखकों से अपील की गई है कि वे अपने शहरों में इस तरह की गतिविधियां करें और एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार कर सभी प्रगतिधील जनवादी ताकतों को जोड़ा जाए। इस अभियान से ज्ञानरंजन, नरेश सक्सेना, अशोक वाजपेयी, इब्बार रब्बी, असग़र वज़ाहत, राजेश जोशी, पंकज बिष्ट, विष्णु नागर, रविभूषण, वीरेंद्र यादव, रामजी राय, रेखा अवस्थी, जय कुमार समेत 500 से अधिक लेखक जुड़े हैं।

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